फोकस्ड ग्रुप्स के साथ फेज्ड-एरे अल्ट्रासाउंड परीक्षण
फोकस्ड ग्रुप्स के साथ फेज्ड-एरे अल्ट्रासाउंड परीक्षण एक उन्नत अल्ट्रासाउंड विधि है, जो प्रोब के व्यक्तिगत क्रिस्टल के समय-नियंत्रित सक्रियण द्वारा ध्वनि किरण को इलेक्ट्रॉनिक रूप से घुमाता और फोकस करता है। यह जटिल ज्यामिति की निर्बाध जांच की अनुमति देता है।
भौतिक-रासायनिक क्रियाविधि
फेज्ड-एरे अल्ट्रासाउंड परीक्षण में कई ध्वनि क्रिस्टल वाला प्रोब इस्तेमाल होता है। इन क्रिस्टलों को समय-नियंत्रित तरीके से चलाने पर ध्वनि किरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से झुकती और फोकस होती है। इससे ध्वनि पथ पर सटीक नियंत्रण और जटिल हिस्सों में फ्लैट स्पॉट या दरारें पकड़ना संभव होता है।
धातुकर्मीय महत्व और वेल्डिंग में जोखिम
यह विधि खास तौर पर ऐसी वेल्ड ज्यामिति की जाँच के लिए उपयोगी है जहाँ पारंपरिक अल्ट्रासाउंड तकनीक से पहुँचना मुश्किल होता है। यह फ्लैट स्पॉट और दरारों की पकड़ और सटीकता बढ़ाती है, जिससे हिस्सों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बेहतर होती है। लेकिन गलत इस्तेमाल या गलत तरीके से चलाने पर नतीजे गलत आ सकते हैं, जो ढाँचे में खराबी का कारण बन सकते हैं।
वर्कशॉप प्रैक्टिस और कार्य निर्देश
फोकस्ड ग्रुप के साथ फेज्ड-एरे अल्ट्रासाउंड परीक्षण सफलतापूर्वक करने के लिए इन चरणों का ध्यान रखें:
1. प्रोब का कैलिब्रेशन: सुनिश्चित करें कि प्रोब सही ढंग से कैलिब्रेट है और ध्वनि क्रिस्टल ठीक काम कर रहे हैं।
2. चालन सेटिंग: क्रिस्टलों की समय-नियंत्रित चालन को इस तरह सेट करें कि ध्वनि किरण मनचाही दिशा में झुके और फोकस हो।
3. परीक्षण करना: प्रोब को जाँच वाली सतह पर घुमाएँ और अल्ट्रासाउंड डेटा कैप्चर करें।
4. नतीजों का मूल्यांकन: फ्लैट स्पॉट या दरारें पहचानने और लोकेट करने के लिए खास सॉफ्टवेयर टूल से कैप्चर किए गए डेटा का विश्लेषण करें।