वेल्ड सीम पश्च-प्रसंस्करण
वेल्ड सीम पश्च-प्रसंस्करण में सतह का यांत्रिक या तापीय परिवर्तन शामिल है, ताकि इसकी थकान शक्ति और संक्षारण प्रतिरोध में सुधार हो। यह पॉलिशिंग, सैंडब्लास्टिंग या रासायनिक उपचार द्वारा किया जा सकता है।
भौतिक-रासायनिक क्रियाविधि
वेल्ड-सीम की पश्च-प्रक्रिया धातु की सतह संरचना और प्रतिक्रियाशीलता को बदलती है। पॉलिशिंग जैसी यांत्रिक विधियाँ सतह दोषों को हटाती हैं और चिकनी सतह बनाती हैं, जबकि ऑस्टेनाइटिंग या टेम्परिंग जैसी तापीय प्रक्रियाएँ क्रिस्टल संरचना को बदलती हैं और ताकत बढ़ाती हैं।
धातुकर्मीय प्रासंगिकता और वेल्डिंग में जोखिम
खराब पश्च-प्रक्रिया से असमान थकान शक्ति हो सकती है, जिससे दरारें और सेवा में विफलता हो सकती है। इसके अलावा, जंग प्रतिरोध की कमी से पिघलना या जंग लगने जैसी घिसने वाली प्रक्रियाएँ हो सकती हैं।
कार्यशाला अभ्यास और निर्देश
सफल पश्च-प्रक्रिया के लिए सही विधि और उपयुक्त सामग्री चुनना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए पॉलिशिंग में: 120 से 320 µm तक खुरदुरापन वाला महीन पॉलिशिंग पत्थर या पॉलिशिंग एजेंट उपयोग करें। रासायनिक उपचार में: धातु को उपयुक्त विलायक में डुबोकर जंग-रोधी सुरक्षा परत लगाएं। हमेशा ध्यान रखें कि सतह को अच्छी तरह साफ करें और सूखा रखें।