तनाव-संक्षारण विदरण
तनाव-संक्षारण विदरण एक विदरणकारी संक्षारण है जो स्थैतिक तन्य तनाव और विशिष्ट संक्षारक माध्यमों के प्रभाव में होता है। यह वेल्ड सीम में दरारें उत्पन्न करता है और सामग्री के विनाश का कारण बन सकता है।
भौतिक-रासायनिक क्रियाविधि
तनाव-संक्षारण विदरण तब उत्पन्न होता है जब धातु के टुकड़े में स्थैतिक तन्य तनाव मौजूद होते हैं और यह पानी या हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जैसे संक्षारक माध्यम के संपर्क में आता है। ये तनाव यांत्रिक भार, वेल्डिंग या निर्माण प्रक्रियाओं से उत्पन्न हो सकते हैं। तनाव के कारण सामग्री दरारों पर तनाव में रहती है और ऑक्सीजन तथा जल जैसे संक्षारक पदार्थ इन दरारों में केंद्रित हो जाते हैं। यह संक्षारण अभिक्रिया को बढ़ाता है और आगे दरारें उत्पन्न करता है।
धातुकर्मीय प्रासंगिकता और वेल्डिंग में जोखिम
तनाव-संक्षारण विदरण वेल्ड सीम के लिए विशेष रूप से खतरनाक है, क्योंकि यह अक्सर वहां हो सकता है। यह वेल्ड सीम के विनाश का कारण बन सकता है और पूरे वर्कपीस को क्षति पहुंचा सकता है। इससे सुरक्षा समस्याएं और रखरखाव तथा मरम्मत की बढ़ी लागत हो सकती है।
कार्यशाला अभ्यास और कार्रवाई निर्देश
tनाव-संक्षारण विदरण से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिए:
1. तनाव निवारण: वेल्डिंग के बाद स्थैतिक तन्य तनाव हटाने के लिए यांत्रिक या रासायनिक विधि का उपयोग करें।
2. संक्षारण संरक्षण: पेंटिंग या गैल्वनाइजिंग जैसे संक्षारण-रोधी सतह उपचार लागू करें।
3. सामग्री चयन: कम तनाव शक्ति वाली सामग्री का उपयोग करें या सावधान निर्माण प्रक्रिया योजना द्वारा दरार निवारण बढ़ाएं।